फिर सुबह होगी

ऐसी बात नहीं है, हम फिर उठ खड़े होंगे, शंका और संशय की सीमाओं को लाँघ, हम फिर बड़े होंगे। ऐसा नहीं है कि मुझे मालूम नहीं है, कि आदमी इतना खुदगर्ज़ है, ऐसा नहीं कि मैंने कभी देखा नहीं, कि स्वार्थ सिद्धि के लिए, आदमी को पतन की कोई भी स्थिति, स्वीकार कर लेने [...]