वो शख्स/Wo Shaqs-

वो शख्स-जो बुझा बुझा सा नज़र आता है आज,उसे जलाया गया था, उम्मीदों के कारखानों में कभी,वो तबदील न हुआ रातों रात राख में यूँ ही,उसे तपाया गया था हिकारत की आतिशों से कहीं,कभी मुस्कुराती थी मासूमियत अक्स में जिसके,अब एक सर्द सी खामोशी पसरी है वहीं,कितना बेज़ार सा मंज़र है उस तन्हाई का,जो उसने [...]

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बहुत हुआ

बहुत हुआ- लिबास ए जिंदगी ओढ़ कर चलते चलते, चल जनाजे के उस पार देखें होता क्या है ? जिस्मों की कैद में बंद हैं जो मजबूर रूहें, उनकी जश्न-ए-आजादी का नज़ारा क्या है? वो कलम जो लिखती है तकदीरें सबकी, उस कलम को चलाने वाली वो शय क्या है? दीदारे जुस्तजू से आबाद हैं [...]