राब्ता

हवा के झोंकों की तरह किन शहरों से निकले किन गलियों में टकराए किस देश में खो गए? अजनबी से लो फिर आज हम अजनबी ही हो गए । जिंदा हूँ हैरान हूँ इन आती जाती साँसों पर मुझे लगा जान मेरी तुम जाते जाते ले गए न जाने जिंदा लाश हूँ या कोई भरम [...]

शब्द/ Words

शब्दों की धारा जब बहती है तब कोई कविता कहती है... मन के गलियारों से निकल भावों में जब वह ढलती है आँखों से मोती बन बहती है तब कोई कविता कहती है शब्दों की धारा जब बहती है... हर कोने से निकल फिसल तेज नदी सी स्वच्छंद मग्न सब बाँध तोड़ के रहती है [...]

रहमतें

​बहुत आबाद हैं मेरी तन्हाइयाँ तेरी रहमतों का असर है तन्हा हो कर भी मैं तन्हा नहीं ये भी तेरा ही करम है। 🌿🌿🌿 रोशन है तू अब भी मेरे दिल के शहर में लगता है हर पल तू संग है मेरी रहगुज़र में अँधेरों से भी अब गिला नहीं अब यही सहर हैं, बहुत [...]

फिर 

फिर यादों का मौसम आया फिर दिल ने आज बहुत रुलाया फिर खुद से ही हार गए हम फिर आँखों का आँगन है नम फिर से नींदें रूठ गई हैं फिर से साँसें डूब रहीं हैं फिर से चाहा तुम्हें भुलाना फिर से जाना नहीं है आसान फिर से कशमकश एक बार फिर फिर से [...]

उस पार न जाने क्या होगा?

प्यार यहीं तकरार यहीं उस पार न जाने क्या होगा? इनकार यहीं इज़हार यहीं उस पार न जाने क्या होगा? तेरा मेरा ये शिकवे गिले सब राख बन उड़ जाएंगे तन अग्नि में जल जाएगा मन की गिरहों का क्या होगा? इस पार बँधी रह जाएँगी, उस पार न जाने क्या होगा? मुँह मोड़ लिया, [...]

जिंदगी/Life 

किस्मत की करवटों हाथ की लकीरों  माँगी गई दुआओं  अधूरी तमन्नाओं से कहीं आगे निकलकर जो एक संकीर्ण पगडंडी है उस पर बिना डिगे बिना डरे चलने का नाम है जिंदगी  उठते कदमों, बुनते सपनों होसलों के परों पर आसमान छूने की चाहत लिए ज़मीं से जुड़े रहने की पहचान है जिंदगी  कुछ मेरी कुछ [...]

बस

जो कल कल बहता दरिया था उन्मुक्त चहकता मदमस्त भरा वो आज अचानक सूख गया वो मन के भीतर इक सूरज था ओज भरा उकसाता सा वो सूखे दरिया संग डूब गया इक इंद्रधनुष रंगीला था सतरंगी आस जगाता सा वो डूबे सूरज संग टूट गया सपनों का सुंदर संसार भी था आँखों में ख्वाबों [...]

ये बँधन/ These Bonds 

कुछ बंधन बँधित होने पर फिर बँधन में न रह पाते इन बंधनों की असीमितता किस बँधन में कहो समाए? आज़ादी के बँधन की खातिर यह बँधित हृदय हाय अकुलाए। बिन बाँधे जिस डोर से बाँधा, यह मन उस डोर से बँधता जाए। जब बँधनों में जकड़ता जाए यह मन, तो सब बँधन इस मन [...]

एक पैकेट जिंदगी/ One Packet Life

Hello friends!  I wrote this poem on request of one elderly lady. Original poem is in hindi along with my attempt to translate it in english. Hope you will enjoy it too.  'एक पैकेट ज़िंदगी' श्वेत निर्मल आत्मा को बाँध माया की डोर से, एक पैकेट जिंदगी का लेकर चला उस ओर से। सीधा मैं [...]

तलाश/Search

निकले तेरी तलाश में लो खुद को भी खो दिया तूने हमें और हमने खुद को ये कैसा धोखा दिया क्या शिकवा करें तुझसे ऐ खुदगर्ज जिंदगी  तुझे जीने की चाह में मौत को भी रुसवा किया न तो तू ही हमारी बनी न ही गले उसे लगने दिया। In search of you I lost [...]

स्वावलंबन/Sovereign 

बिन परिचय के जो ढह जाए ऐसे जीवन का परिचय क्या ? भीड़ में खोकर बहता जाए, अस्तित्व का ऐसे वर्चस्व ही क्या? धरती से ऊपर को उठकर, अपना आकाश जो रहा बना, स्वयं गगन झुके उसके आगे, करने को धरा का निर्माण नया। अनगिनत तारे उस अनंत व्योम में, दीपायमान हो गर्वित हैं, अपना [...]

फरियाद/Appeal 

​ This poem is written in hindi, using many urdu words along with its english translation below, which was a big challenge for me this time ☺ ऐ खुदा यह तो कोई इंसाफ नहीं! भरी भीड़ में एक हम ही तो गुनहगार नहीं! कौन है जो आरज़ू से घिरा न हो? कौन है जो तमन्नाओं [...]

सरल/Simple 

​ सरल है कविता सरल है भाषा, सरलता किंतु गूणार्थ भरी है। जैसे भटके चंचल मृग वन में, कस्तूरी जिसके अंक छिपी है। दीवानों सा भटक रहा वह, जब जब सुगंधित पवन बही है। ........................................................... चमक में चाँदनी की खोए चाँद को, उस दिनकर का आभास नहीं है। जो करता प्रकाशित उसको हर पल, फिर [...]

कारवाँ/Carvan

ज़रूरी नहीं जीवन में हमराह बना जाए, ये वक्त की आँधी न जाने कहाँ ले जाए? चाहे जिस ओर बढ़ जाए कारवाँ हमारा, पर बीते वक्त की आहटों में आज भी, सुनते हैं झन्कार साथ खिलखिलाने की, तन्हाई में अब भी आती हैं आवाज़ें, कभी रूठ जाने की तो कभी मनाने की, यह जीवन तो [...]

एकाकी / Lonely

है मोन जो अनमोल वह, किन्तु-  अनमोलता का मोल क्या? दूर भीड़ की वाचालता से खामोशी ने तन्हाई से कहा- "शाँत एकाकी रह हमने जाने क्या क्या न सहा?" है धीर मन गंभीर किंतु अधीरता का सागर वहाँ घर छोड़ कर बहने से पहले आँसुओं ने आँखों से कहा- "फिर लौट कर आएँगे हम तो, [...]

फिर कभी नहीं/ Never Again 

​ मैं तो बेल थी लिपटी हुई उस शाख से बढ़ती हुई कुछ और बढ़ने की चाह में क्या मिला  मुझे कुचल तुम्हें? मैं नदी थी अल्हड़ सी भागती अपनी ही धुन में नाचती क्या तेज़ मेरी चाल थी क्यों रोका मेरे प्रवाह को फिर? मैं कली थी कुछ नादान सी सुंदर मेरी मुस्कान थी [...]

कतरा कतरा

​कतरा कतरा दूर दूर बिखरे नन्हे क्षण एकत्र किए हमने जीवन के इस लम्बे सफर में कई संकुचित मोड़ों से गुजरे किंतु जिए केवल ये कुछ क्षण बाकी तो मर मर के बीते तभी तो दिल पूछा करता है कैसे नादां हैं ये इंसान। हर दिन मरते हर पल मरते किंतु मौत से फिर भी [...]