यादों में कहीं

यादों में कहीं कोई सुराख न कर दे, इस बात से डर लगता है, छन-छन के बह न जाएँ एक-एक कर, इस बात से डर लगता है! फ़क़त ये चंद मोती हैं, जो सँभाले हैं जीने के लिए, लेकिन यूँ न समझ लेना कि मुझे मौत से डर लगता है! परछाईं की माफिक धीरे-धीरे सिमट [...]

क्या ख़रीदने निकले हो

क्या खरीदने निकले हो खुशियाँ बिकती नहीं और गम का कोई खरीददार नहीं, आस सस्ती नहीं और बेसब्री का कोई हिसाब नहीं, प्यार महंगा है बहुत और नफरतों को पालना आसान नहीं, शांति की कोई दुकान नहीं और अशांति का समाधान नहीं, क्या ख़रीदने निकले हो? बिकने वाली चीज़ खुद मजबूर है और जो बिकती [...]

कतरे से गुहर

कतरे से गुहर बहुत कुछ गुज़री है ए-दिल कतरे से गुहर होने तक, यूँ ही तो नहीं सफर कामिल है, बादल से बिछड़ सीप के सीने तक, गम-ए-जुदाई, खौफ-ए-तन्हाई, खौफज़दा मुसाफ़िर, और चल देना यूँ ही तन्हा, किसी अंजाम का आगाज़ होने तक, आंधियों का सफर और गर्क होने का डर, अंदेशों से लिपट, हर [...]