खोज

खोज दर-ब-दर, हर तरफ ढूंढता हूँ, घर में रहकर भी एक घर ढूँढता हूँ ! प्यासा हूँ कुछ इस कदर कि- दरिया किनारे भी आब, शिद्दत से ढूंढता हूँ ! वो कहते हैं पागल दीवाना मुझे, मैं दीवानगी में भी उन्हीं को ढूँढता हूँ ! कैसे करूँ बयाँ अहसासों को शब्दों में, मैं बयां करने [...]

घर की वीरानी

घर की वीरानी घर की वीरानी में भी दीवारें बोल उठती हैं, अक्सर तन्हाई में भी ये महफिलें शोर करती हैं, अकेले में भी तन्हा न रहूँ, ये कोशिशें इन ईंट-पत्थरों की, ज़मीं पर ही जन्नत के नज़ारे खोल देती हैं, देखती हूँ गौर से जब इन दर-और-दीवारों को, वो सीने में दफ़न कई राज़ [...]

जैसे कुछ हुआ ही नहीं

जैसे कुछ हुआ ही नहीं एक उम्र गुज़ारनी है तेरे बगैर और हम जी रहे हैं ऐसे, जैसे कुछ हुआ ही नहीं शरीर से दिल निकल गया, तेरी साँसों के साथ और हम साँस ले रहे हैं ऐसे, जैसे कुछ हुआ ही नहीं लुट गई हँसी, लुट गई खुशी, लुट गई जिंदगी और हम मुस्कुरा [...]