खोज

खोज दर-ब-दर, हर तरफ ढूंढता हूँ, घर में रहकर भी एक घर ढूँढता हूँ ! प्यासा हूँ कुछ इस कदर कि- दरिया किनारे भी आब, शिद्दत से ढूंढता हूँ ! वो कहते हैं पागल दीवाना मुझे, मैं दीवानगी में भी उन्हीं को ढूँढता हूँ ! कैसे करूँ बयाँ अहसासों को शब्दों में, मैं बयां करने [...]

जैसे कुछ हुआ ही नहीं

जैसे कुछ हुआ ही नहीं एक उम्र गुज़ारनी है तेरे बगैर और हम जी रहे हैं ऐसे, जैसे कुछ हुआ ही नहीं शरीर से दिल निकल गया, तेरी साँसों के साथ और हम साँस ले रहे हैं ऐसे, जैसे कुछ हुआ ही नहीं लुट गई हँसी, लुट गई खुशी, लुट गई जिंदगी और हम मुस्कुरा [...]

धूप की दस्तक

Read my thoughts on YourQuote app धूप की दस्तक मेरे सफेदपोश जमे कोहरे पर पड़ी और उसकी घनी सफेद जालियों में सुराख़ कर मेरे अंतर्मन तक जा पहुंची कह नहीं सकती, कि निराशा कमज़ोर पड़ रही थी, या आशा इतनी प्रबल थी, कि धूप की दस्तक पहचान सांस लेने लगे थे, मेरे सभी उजाले जिन्हें [...]