संभलने दे ज़रा

संभलने दे ज़रा अभी नासूर बन गम रिस रहा है, ज़ख्म ताज़ा हैं अभी, घाव भी नया-नया है । न उम्मीदें लगा मुझसे यूँ मुस्कुराने की, तू क्या जाने जो खोया उसकी कीमत क्या है ? संभलने दे ज़रा तपती रेत पर चल कर आई हूँ दूर से, अभी तेरे संगमरमर भी मेरे पाँव के [...]

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धूप की दस्तक

Read my thoughts on YourQuote app धूप की दस्तक मेरे सफेदपोश जमे कोहरे पर पड़ी और उसकी घनी सफेद जालियों में सुराख़ कर मेरे अंतर्मन तक जा पहुंची कह नहीं सकती, कि निराशा कमज़ोर पड़ रही थी, या आशा इतनी प्रबल थी, कि धूप की दस्तक पहचान सांस लेने लगे थे, मेरे सभी उजाले जिन्हें [...]