शजर का कफन

काश सुन लेते तुम कटते शजर की सिसकियाँ,काश देख सकते उजड़े घरोंदों की वीरानियाँ,काश पहुँच जातीं तुम तक पंछियों की कराहटें,काश महसूस होता दर्द टूटती टहनियों का तुम्हें, काश पढ़ लेती आँखें तुम्हारी पत्ते-पत्ते की गुज़ारिशें, काश ईंट-पत्थर की इमारतें शजरों का न कफन होता, काश बेलगाम लालच तुम्हारा इस कदर न बढ़ा होता, तो [...]