मैं अमृता नहीं हो सकती

लेखिका होना आसान है लेकिन लिखना आसान नहीं, हर बार जब कलम उठती है तो शब्द मन से कागज़ पर आते-आते खुद ही बदल जाते हैं । उन्हें भी पता है कि ऐसे के ऐसे उतर गए तो बहुत से प्रश्नचिन्हों से घेर लिए जाएँगे। वो प्रश्नचिन्ह उन्हें डराते हैं । तो कभी साँप बन कर गोल-गोल नाचते हैं कहते हैं उनकी लम्बी जीभ से निगल लिए जाओगे । कभी रात का अंधेरा बनकर सब काला कर जाते हैं यहाँ तक कि सपने भी। कभी सिग्नल पर खड़े ट्रैफिक पुलिस की तरह लाइसेंस माँगते हैं । कभी समाज बनकर खड़े हो जाते हैं रास्ता रोक कर और कहते हैं जहाँ से आए हो वापिस वहाँ चले जाओ, यूँ बिना सर ढके घूमने की इजाज़त नहीं है तुम्हें । मैं समझाना चाहती हूँ उन्हें, कि अरे ये जींस और ड्रेस पहन कर दुपट्टे कौन पहनता है ? लेकिन वो कहते हैं हम समाज हैं जैसा कहें वैसा करो; सर और दिल तो ढक कर ही रखना होगा बराबरी बस जींस तक रखो। मैं समझाती हूँ उन्हें कि मैं लैला, सोहनी या शिरी नहीं अमृता हूँ । वो ज़ोर से हँसते हैं और कहते हैं अच्छा पागल समझा है क्या ? बताओ तुम अमृता हो तो कहाँ है तुम्हारा इमरोज़ ? मैं खामोश हो जाती हूँ । फिर पैन से कागज़ पर उतरी स्याही वापिस सोख लेती हूँ पैन में । मेरे पास बचपन का निब पैन जो सँभालकर रखा है न उसी में । बस शब्द ज़िद बहुत करते हैं बाहर निकलने की, किसी ज़िद्दी बच्चे की तरह । लेकिन अब बच्चों की हर ज़िद तो नहीं मानी जा सकती । फिर यह भी सच ही है कि मेरे पास कोई इमरोज़ नहीं सो यह तो तय है मैं अमृता भी नहीं हो सकती । अमृता होना आज भी आसान नहीं ।

-2020 Meenakshi Sethi, wingsofpoetry

6 thoughts on “मैं अमृता नहीं हो सकती

  1. अमृता होना दुर्लभ है और दुष्कर भी. ज्यादातर लोगों के लिए उस सरलता के साथ जीना संभव नहीं.

    Liked by 1 person

    1. बिलकुल सही । और एक पहलू ये भी है कि अमृता होने के लिए इमरोज़ ज़रूरी है । वो अमृता को बल देता है उसे एक निखार देता है । अमृता को अमृता बनाता है ।

      Like

      1. मैं नहीं जानती कि अमृता को किसने अमृता बनाया पर लेखन द्वारा अभिव्यक्ति को मैने यही समझा है कि आदमी अगर जंगल में रहे तो पशु-पक्षी, पेड़-पौधै बिना कहे भी समझ सकते हैं। वहाँ जीवन प्रार्थना या आनंद हो सकता है पर समाज में, इंसानों के बीच लेखन बस एक रूहानी बीमारी है जिसका किसी और से कुछ लेना-देना नहीं है।

        Liked by 1 person

  2. I used a translator (which I hope was accurate) and found your words to be a powerful and poignant window into your world and the reflections of your soul. Blessings, MW ❤️

    Liked by 1 person

Leave a Reply

Please log in using one of these methods to post your comment:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s